हो जाने वाले रामकृष्ण का अद्वैतवाद ही ऐसा था जो आत्मत्यागी और सत्यनिष्ठ युवकों को अपनी ओर आकृष्ट कर रहा था, पर नरेन्द्र की तर्क-बुुद्वि उससे भी अपना सामंजस्य स्थापित नहीं कर पा रही थी।
नरेन्द्र ने अठारह बरस की आयु में दक्षिणेश्वर जाना शुरू किया था, अब बी.ए. की परीक्षा देते समय उसकी आयु इक्कीस बरस थी। यह तय था कि व्यक्तिगत सुख भोग को उसने अपने आदर्श के रूप में कभी ग्रहण नहीं किया था। सत्य का अनुसंधान समाज, राष्ट्र और
हो जाने वाले रामकृष्ण का अद्वैतवाद ही ऐसा था जो आत्मत्यागी और सत्यनिष्ठ युवकों को अपनी ओर आकृष्ट कर रहा था, पर नरेन्द्र की तर्क-बुुद्वि उससे भी अपना सामंजस्य स्थापित नहीं कर पा रही थी।
नरेन्द्र ने अठारह बरस की आयु में दक्षिणेश्वर जाना शुरू किया था, अब बी.ए. की परीक्षा देते समय उसकी आयु इक्कीस बरस थी। यह तय था कि व्यक्तिगत सुख भोग को उसने अपने आदर्श के रूप में कभी ग्रहण नहीं किया था। सत्य का अनुसंधान समाज, राष्ट्र और