योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

मानव जाति का कल्याण ही उसके जीवन का परमध्येय था। अपने आप को इस ध्येय के अनुरूप बनाने के लिए, जिस तरह सोना कुठाली में पिघलाया जाता है, नरेन्द्र ने अपने मस्तिष्क को ज्ञान की कुठाली में पिघला डाला था, लेकिन इस चमकते-मचलते तरल पदार्थ को कुठाली से निकालकर ठोस रूप देने वाला आदर्श पुरूष उसे अभी नहीं मिला था और यह अधिकार उसने अभी रामकृष्ण को भी नहीं दिया था।

इन दिनों वह पाश्चात्य दार्शनिक हेमिल्टन से अधिक प्रभावित था। हेमिल्टन


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मानव जाति का कल्याण ही उसके जीवन का परमध्येय था। अपने आप को इस ध्येय के अनुरूप बनाने के लिए, जिस तरह सोना कुठाली में पिघलाया जाता है, नरेन्द्र ने अपने मस्तिष्क को ज्ञान की कुठाली में पिघला डाला था, लेकिन इस चमकते-मचलते तरल पदार्थ को कुठाली से निकालकर ठोस रूप देने वाला आदर्श पुरूष उसे अभी नहीं मिला था और यह अधिकार उसने अभी रामकृष्ण को भी नहीं दिया था।

इन दिनों वह पाश्चात्य दार्शनिक हेमिल्टन से अधिक प्रभावित था। हेमिल्टन


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