इस माध्यम से भी अद्वैतवादी सिद्वान्त के निकट पहुंच गया था। अब थोड़ा ही फासला तय करना बाकी रह गया था।
ऐसी मन-स्थिति में कई बार जीवन-घटनाएं भी निर्णायक भूमिका अदा करती हैं। बी.ए. पास कर लेने से पहले ही विश्वनाथ ने बेटे को प्रसिद्व अटार्नी निमाईचरण बसु के पास जाकर कानून की शिक्षा पाने का आदेश दिया ताकि वह भी पिता की तरह सफल वकील बने। फिर वे यह भी चाहते थे कि नरेन्द्र रामकृष्ण के चक्कर से निकले और विवाह करके गृहस्थ बने।
इस माध्यम से भी अद्वैतवादी सिद्वान्त के निकट पहुंच गया था। अब थोड़ा ही फासला तय करना बाकी रह गया था।
ऐसी मन-स्थिति में कई बार जीवन-घटनाएं भी निर्णायक भूमिका अदा करती हैं। बी.ए. पास कर लेने से पहले ही विश्वनाथ ने बेटे को प्रसिद्व अटार्नी निमाईचरण बसु के पास जाकर कानून की शिक्षा पाने का आदेश दिया ताकि वह भी पिता की तरह सफल वकील बने। फिर वे यह भी चाहते थे कि नरेन्द्र रामकृष्ण के चक्कर से निकले और विवाह करके गृहस्थ बने।