योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

इसलिए एक दिन उसे वहां जाने से मना करते हुए कहा, ‘‘वह सब समाधि भाव, जो कुछ तुम देखते हो, स्नायु की दुर्बलता ही के चिहृ हैं। अत्यधिक शारीरिक कठोरता का अभ्यास करने के कारण परमहंस का मस्तिष्क बिगड़ गया है।’’

नरेन्द्र ने शिवनाथ बाबू की बात का कोई उत्तर नहीं दिया। वह उठकर वहां से चला आया। उसके मस्तिष्क में आंधी चल रही थी। और नाना प्रकार के प्रश्न उठ रहे थे। ‘‘ये सरल-हृदय महापुरूष कया है? क्या वे सचमुच विकृत मस्तिष्क है? मुझ


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इसलिए एक दिन उसे वहां जाने से मना करते हुए कहा, ‘‘वह सब समाधि भाव, जो कुछ तुम देखते हो, स्नायु की दुर्बलता ही के चिहृ हैं। अत्यधिक शारीरिक कठोरता का अभ्यास करने के कारण परमहंस का मस्तिष्क बिगड़ गया है।’’

नरेन्द्र ने शिवनाथ बाबू की बात का कोई उत्तर नहीं दिया। वह उठकर वहां से चला आया। उसके मस्तिष्क में आंधी चल रही थी। और नाना प्रकार के प्रश्न उठ रहे थे। ‘‘ये सरल-हृदय महापुरूष कया है? क्या वे सचमुच विकृत मस्तिष्क है? मुझ


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