जैसे तुच्छ व्यक्ति से वे इतना प्यार किसलिए करते हैं? यह रहस्य क्या है?’’
ब्रह्मसमाज के अधिकांश नेताओं से नरेन्द्र का परिचय था। वह उनके पाण्डित्य से प्रभावित था, लेकिन उनमें से किसी के प्रति भी नरेन्द्र के मन में इतनी श्रद्वा नहीं थी, जितनी रामकृष्ण के प्रति। अब उन सबके चेहरे एक-एक करके उसकी आंखों के सामने घूमने लगे। उसने अपने आपसे पूछा कि इतने दिन ब्रह्मसमाज में उपासना-प्रार्थना करके भी उसका हृदय शान्त क्यों नहीं हुआ?
जैसे तुच्छ व्यक्ति से वे इतना प्यार किसलिए करते हैं? यह रहस्य क्या है?’’
ब्रह्मसमाज के अधिकांश नेताओं से नरेन्द्र का परिचय था। वह उनके पाण्डित्य से प्रभावित था, लेकिन उनमें से किसी के प्रति भी नरेन्द्र के मन में इतनी श्रद्वा नहीं थी, जितनी रामकृष्ण के प्रति। अब उन सबके चेहरे एक-एक करके उसकी आंखों के सामने घूमने लगे। उसने अपने आपसे पूछा कि इतने दिन ब्रह्मसमाज में उपासना-प्रार्थना करके भी उसका हृदय शान्त क्यों नहीं हुआ?