क्या इनमें से किसी को भी ईश्वर-प्राप्ति हुई है?
सत्येन्द्रनाथ मजूमदार अपनी पुस्तक ‘विवेकानन्द-चरित’ में लिखते हैंः
‘‘एक दिन ईश्वर प्राप्ति के लिए तीव्र व्याकुलता लेकर नरेन्द्र घर से निकल पड़े। महर्षि देवेन्द्रनाथ उस समय गंगाजी पर एक नौका में रहा करते थे, नरेन्द्र गंगा किनारे पहुंचकर जल्दी से नौका पर चढ़ आए। उनके जा़ेर से धक्का देने पर दरवाज़ा खुल गया। महर्षि उस समय ध्यानमग्न थे, एकाएक शब्द सुनकर चैंक उठे। देखा, सामने
क्या इनमें से किसी को भी ईश्वर-प्राप्ति हुई है?
सत्येन्द्रनाथ मजूमदार अपनी पुस्तक ‘विवेकानन्द-चरित’ में लिखते हैंः
‘‘एक दिन ईश्वर प्राप्ति के लिए तीव्र व्याकुलता लेकर नरेन्द्र घर से निकल पड़े। महर्षि देवेन्द्रनाथ उस समय गंगाजी पर एक नौका में रहा करते थे, नरेन्द्र गंगा किनारे पहुंचकर जल्दी से नौका पर चढ़ आए। उनके जा़ेर से धक्का देने पर दरवाज़ा खुल गया। महर्षि उस समय ध्यानमग्न थे, एकाएक शब्द सुनकर चैंक उठे। देखा, सामने