योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



थोड़े ही दिन बाद उसके पिता हृदय रोग से अचानक चल बसे। नरेन्द्र के लिए यह भयंकर आघात था। सारे परिवार पर मुसीबत का पहाड़ टूटा। विश्वनाथ ने धन बहुत कमाया था, पर जितना कमाते थे उससे कहीं अधिक खर्च करते थे। उनके मरते ही कर्ज़ख्वाहों ने आ घेरा। कर्ज चुकाना तो दूर रहा, छः-सात व्यक्तियों के लिए अन्न जुटाना समस्या बन गई। कहां रईसी ठाठ थे और कहां अब फाकों की नौबत आ गई। नरेन्द्र ने पहली बार दरिद्रता का स्वाद चखा। मित्र भी आजमाए गए,


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थोड़े ही दिन बाद उसके पिता हृदय रोग से अचानक चल बसे। नरेन्द्र के लिए यह भयंकर आघात था। सारे परिवार पर मुसीबत का पहाड़ टूटा। विश्वनाथ ने धन बहुत कमाया था, पर जितना कमाते थे उससे कहीं अधिक खर्च करते थे। उनके मरते ही कर्ज़ख्वाहों ने आ घेरा। कर्ज चुकाना तो दूर रहा, छः-सात व्यक्तियों के लिए अन्न जुटाना समस्या बन गई। कहां रईसी ठाठ थे और कहां अब फाकों की नौबत आ गई। नरेन्द्र ने पहली बार दरिद्रता का स्वाद चखा। मित्र भी आजमाए गए,


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