योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

व चिंता प्रकट नहीं की। और मै। अपनी इस दुरवस्था को किसी पर प्रकट न करता था....(रामकृष्ण, पृष्ठ 262)

नरेन्द्र के चरित्र-गठन में मां का प्रभाव सबसे अधिक था। वे एक धर्मप्राण महिला थी। पर इस घोर संकट में उनका विश्वास भी डगमगा गया। एक दिन सुबह जब नरेन्द्र बिस्तर पर बैठा प्रार्थना कर रहा था, मां ने चिढ़कर कहा, ‘चुप रह छोकरे, बचपन ही से केवल भगवान-भगवान! भगवान ही ने तो यह सब किया है!’ मां की यह बात नरेन्द्र को कौंच गई। वह सोचने


188 of 1197

व चिंता प्रकट नहीं की। और मै। अपनी इस दुरवस्था को किसी पर प्रकट न करता था....(रामकृष्ण, पृष्ठ 262)

नरेन्द्र के चरित्र-गठन में मां का प्रभाव सबसे अधिक था। वे एक धर्मप्राण महिला थी। पर इस घोर संकट में उनका विश्वास भी डगमगा गया। एक दिन सुबह जब नरेन्द्र बिस्तर पर बैठा प्रार्थना कर रहा था, मां ने चिढ़कर कहा, ‘चुप रह छोकरे, बचपन ही से केवल भगवान-भगवान! भगवान ही ने तो यह सब किया है!’ मां की यह बात नरेन्द्र को कौंच गई। वह सोचने


188 of 1197