काम नहीं मिला। आखिर उसने सोचा कि साधारण मनुष्य की तरह धनोपार्जन के लिए उसका जन्म नहीं हुआ है। उसे अपने दादा की तरह संन्यास धारण करना होगा। जाने का दिन भी निश्चित हो गया। पर उसी दिन परमहंस पड़ोस के एक मकान में आए। नरेन्द्र उनके दर्शन करने गया और वे उसे आग्रहपूर्वक अपने साथ दक्षिणेश्वर ले आए। दक्षिणेश्वर पहुंचकर मैं दूसरों के साथ कमरे में बैठा था। इतने में ठाकुर को भावावेश हुआ, देखते-देखते वे एकाएक मेरे पास आए और मुझे प्रेम से पकड़कर आंसु बहाते हुए गाने लगे:
काम नहीं मिला। आखिर उसने सोचा कि साधारण मनुष्य की तरह धनोपार्जन के लिए उसका जन्म नहीं हुआ है। उसे अपने दादा की तरह संन्यास धारण करना होगा। जाने का दिन भी निश्चित हो गया। पर उसी दिन परमहंस पड़ोस के एक मकान में आए। नरेन्द्र उनके दर्शन करने गया और वे उसे आग्रहपूर्वक अपने साथ दक्षिणेश्वर ले आए। दक्षिणेश्वर पहुंचकर मैं दूसरों के साथ कमरे में बैठा था। इतने में ठाकुर को भावावेश हुआ, देखते-देखते वे एकाएक मेरे पास आए और मुझे प्रेम से पकड़कर आंसु बहाते हुए गाने लगे: