‘हम दोनों में वैसा ही कुछ हो गया।’ बाद में सब लोगों के चले जाने पर मुझे पास बुलाकर उन्होंने कहा, ‘जानता हूं, तू मां के काम के लिए संसार में आया है। संसार में तू कभी नहीं रहेगा, परंन्तु जब तक मैं हूं तब तक मेरे लिए रह।’ इतना कहकर वे हृदय के आवेग से पुनः आंसु रोक न सके।’’ (वहीं, पृष्ठ 179-80)
नरेन्द्र दक्षिणेश्वर से घर लौटा। फिर वही आजीविका की ंिचंता। एक एटर्नी के अािफस में कुछ काम करके और कुछ पुस्तकों के अनुवाद से थोड़ा
‘हम दोनों में वैसा ही कुछ हो गया।’ बाद में सब लोगों के चले जाने पर मुझे पास बुलाकर उन्होंने कहा, ‘जानता हूं, तू मां के काम के लिए संसार में आया है। संसार में तू कभी नहीं रहेगा, परंन्तु जब तक मैं हूं तब तक मेरे लिए रह।’ इतना कहकर वे हृदय के आवेग से पुनः आंसु रोक न सके।’’ (वहीं, पृष्ठ 179-80)
नरेन्द्र दक्षिणेश्वर से घर लौटा। फिर वही आजीविका की ंिचंता। एक एटर्नी के अािफस में कुछ काम करके और कुछ पुस्तकों के अनुवाद से थोड़ा