योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

पैसा मिलने लगा। लेकिन इतने बड़े परिवार के लिए यह काफी न था। सोच-सोचकर नरेन्द्र दक्षिणेश्वर पहुंचा और हठपूर्वक ठाकुर से कहा, ‘‘मां, भाइयों का कष्ट दूर करने के लिए आपको मां जगदम्बा से प्रार्थना करनी होगी।’’ रामकृष्ण ने सस्नेह उत्तर दिया ‘‘अरे, मैंने तो कितनी ही बार कहा है, ‘मां! नरेन्द्र का दुख-कष्ट दूर कर दो। तू मां को नहीं मानता, इसलिए मां नहीं सुनती। अच्छा, आज मंगलवार है, मैं कहता हूं, आज रात को काली-मंदिर में जाकर मां को प्रणाम करके तू जो कुछ मांगेगा,


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पैसा मिलने लगा। लेकिन इतने बड़े परिवार के लिए यह काफी न था। सोच-सोचकर नरेन्द्र दक्षिणेश्वर पहुंचा और हठपूर्वक ठाकुर से कहा, ‘‘मां, भाइयों का कष्ट दूर करने के लिए आपको मां जगदम्बा से प्रार्थना करनी होगी।’’ रामकृष्ण ने सस्नेह उत्तर दिया ‘‘अरे, मैंने तो कितनी ही बार कहा है, ‘मां! नरेन्द्र का दुख-कष्ट दूर कर दो। तू मां को नहीं मानता, इसलिए मां नहीं सुनती। अच्छा, आज मंगलवार है, मैं कहता हूं, आज रात को काली-मंदिर में जाकर मां को प्रणाम करके तू जो कुछ मांगेगा,


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