प्राप्त करके उनसे कह दूं- कोहंड़ा मांगना।‘ -यह भी वैसी मूर्खता की बात है। मेरी भी वैसी हीन बुद्वि हुई है। लज्जा से प्रणाम करते हुए मैंने फिर कहा, ‘मैं और कुछ नहीं मांगता मां, केवल ज्ञान और भक्ति दो...।
आगे की बात परमहंस के एक भक्त तारापद घोष के मुख से सुनिए, ‘‘आज दोपहर को दक्षिणेश्वर जाकर मैंने देखा-श्रीरामकृष्णदेव अकेले कमरे में बैठे हैं और नरेन्द्र बाहर एक ओर पड़ा सो रहा है। पास जाकर प्रणाम करते ही उन्होंने नरेन्द्र को दिखाकर कहा,
प्राप्त करके उनसे कह दूं- कोहंड़ा मांगना।‘ -यह भी वैसी मूर्खता की बात है। मेरी भी वैसी हीन बुद्वि हुई है। लज्जा से प्रणाम करते हुए मैंने फिर कहा, ‘मैं और कुछ नहीं मांगता मां, केवल ज्ञान और भक्ति दो...।
आगे की बात परमहंस के एक भक्त तारापद घोष के मुख से सुनिए, ‘‘आज दोपहर को दक्षिणेश्वर जाकर मैंने देखा-श्रीरामकृष्णदेव अकेले कमरे में बैठे हैं और नरेन्द्र बाहर एक ओर पड़ा सो रहा है। पास जाकर प्रणाम करते ही उन्होंने नरेन्द्र को दिखाकर कहा,