योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

‘‘देख, यह लड़का बड़ा अच्छा है, इसका नाम नरेन्द्र है। पहले मां को नहीं मानता था, कल मान गया है। कष्ट में है, इस कारण मां से पैसा-रूपया मांगने के लिए कह दिया था, परंतु मांग नहीं सका, कहा लज्जा आती है। मंदिर से लौटकर मुझसे कहा, मां का गाना सिखा दीजिए। ‘मांर्तवं ही तारा’ यह गाना सिखा दिया। कल रात भर वही गाना गाया, अब पड़ा सो रहा है। (प्रसन्नता से हंसते हुए) नरेन्द्र ने काली को मान लिया, बहुत अच्छा हुआ न?’ उन्हें इस बात से बालक के समान आनन्दित होते देख मैंने कहा,


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‘‘देख, यह लड़का बड़ा अच्छा है, इसका नाम नरेन्द्र है। पहले मां को नहीं मानता था, कल मान गया है। कष्ट में है, इस कारण मां से पैसा-रूपया मांगने के लिए कह दिया था, परंतु मांग नहीं सका, कहा लज्जा आती है। मंदिर से लौटकर मुझसे कहा, मां का गाना सिखा दीजिए। ‘मांर्तवं ही तारा’ यह गाना सिखा दिया। कल रात भर वही गाना गाया, अब पड़ा सो रहा है। (प्रसन्नता से हंसते हुए) नरेन्द्र ने काली को मान लिया, बहुत अच्छा हुआ न?’ उन्हें इस बात से बालक के समान आनन्दित होते देख मैंने कहा,


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