अन्य कोई नहीं-अपने मां-भाई भी नहीं। उनके इस प्रकार के विश्वास और प्यार ही ने मुझे जन्म भर के लिए बांध लिया है। केवल वही प्यार करना जानते हैं और कर सकते है।-संसार के दूसरे लोग केवल अपने स्वार्थ साधन के लिए प्यार करते हैं।’ ’’(वही पृष्ठ 182 से 185)
मूर्ति पूजा से घृणा करने वाला नरेन्द्र अंत में खुद मूर्तिपूजक बन गया। पे्रम से तर्क पराजित हुआ। बाद को जब वे नरेन्द्र विवेकानन्द बन गए थे, तब उन्होंने कुमारी मेरी हेल को लांस एंजिलिस से 18 जून,
अन्य कोई नहीं-अपने मां-भाई भी नहीं। उनके इस प्रकार के विश्वास और प्यार ही ने मुझे जन्म भर के लिए बांध लिया है। केवल वही प्यार करना जानते हैं और कर सकते है।-संसार के दूसरे लोग केवल अपने स्वार्थ साधन के लिए प्यार करते हैं।’ ’’(वही पृष्ठ 182 से 185)
मूर्ति पूजा से घृणा करने वाला नरेन्द्र अंत में खुद मूर्तिपूजक बन गया। पे्रम से तर्क पराजित हुआ। बाद को जब वे नरेन्द्र विवेकानन्द बन गए थे, तब उन्होंने कुमारी मेरी हेल को लांस एंजिलिस से 18 जून,