योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

1900 के पत्र में लिखा थाः ‘‘काली-पूजा किसी भी धर्म का आवश्यक साधन है। धर्म के विषय में जितना कुछ भी जानने योग्य है, तुमने कभी भी उसके विषय में मुझे प्रवचन करते या भारत में उसकी शिक्षा देते हुए नहीं सुना होगा। मैं केवल उन्हीं चीजों की शिक्षा देता हूं, जो विश्वमानवता के लिए हितकर हैं। यदि कोई ऐसी विचित्र विधि है, जो केवल मुझी पर लागू होती है, तो मैं उसे गुप्त रखता हूं, और यहीं पर बात खत्म हो जाती है। मैं तुम्हें नहीं बताऊंगा कि काली-पूजा क्या है,


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1900 के पत्र में लिखा थाः ‘‘काली-पूजा किसी भी धर्म का आवश्यक साधन है। धर्म के विषय में जितना कुछ भी जानने योग्य है, तुमने कभी भी उसके विषय में मुझे प्रवचन करते या भारत में उसकी शिक्षा देते हुए नहीं सुना होगा। मैं केवल उन्हीं चीजों की शिक्षा देता हूं, जो विश्वमानवता के लिए हितकर हैं। यदि कोई ऐसी विचित्र विधि है, जो केवल मुझी पर लागू होती है, तो मैं उसे गुप्त रखता हूं, और यहीं पर बात खत्म हो जाती है। मैं तुम्हें नहीं बताऊंगा कि काली-पूजा क्या है,


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