क्योंकि कभी मैंने इसकी शिक्षा किसी को नहीं दी।’’ (वि. सा, अष्टम खंड, पृष्ठ 339-40)
शिक्षा में वे सिद्वांत ही को प्रमुख मानते थे, यह बात स्वामी त्रिगुणातीतानन्छ को न्यूयार्क के लिखे 14 अपै्रल, 1896 के पत्र से भी स्पष्ट हो जाती हैः
‘‘रामकृष्ण परमहंस ईश्वर हैं, भगवान हैं-क्या इस प्रकार की बातें यहां चल सकती हैं?’’
‘‘सबके हृदय में बलपूर्वक उस प्रकार की भावना को बद्वमूल कर देने का झुकाव ‘मैं’ में विद्यमान है। किन्तु
क्योंकि कभी मैंने इसकी शिक्षा किसी को नहीं दी।’’ (वि. सा, अष्टम खंड, पृष्ठ 339-40)
शिक्षा में वे सिद्वांत ही को प्रमुख मानते थे, यह बात स्वामी त्रिगुणातीतानन्छ को न्यूयार्क के लिखे 14 अपै्रल, 1896 के पत्र से भी स्पष्ट हो जाती हैः
‘‘रामकृष्ण परमहंस ईश्वर हैं, भगवान हैं-क्या इस प्रकार की बातें यहां चल सकती हैं?’’
‘‘सबके हृदय में बलपूर्वक उस प्रकार की भावना को बद्वमूल कर देने का झुकाव ‘मैं’ में विद्यमान है। किन्तु