लोगों को उनके व्यक्तित्व के बारे में अपनी-अपनी धारणा के अनुसार सोचने दो....’’ (वि.सा., चतुर्थ खंड, पृष्ठ 394)
गुरू-भाइयों के नाम 27 अप्रैल, 1896 को इंग्लैंड से लिखे एक लम्बे पत्र में रामकृष्ण के व्यक्तित्व और सिद्वांतों पर उन्होंने इस प्रकार प्रकाश डाला हैः
‘‘मतों आदि के बारे में मुझे यही कहना है कि यदि कोई रामकृष्णदेव को अवतार आदि स्वीकार करे तो भी ठीक ही है। परंन्तु सच बात तो यह है कि चरित्र के विषय में श्री रामकृष्ण
लोगों को उनके व्यक्तित्व के बारे में अपनी-अपनी धारणा के अनुसार सोचने दो....’’ (वि.सा., चतुर्थ खंड, पृष्ठ 394)
गुरू-भाइयों के नाम 27 अप्रैल, 1896 को इंग्लैंड से लिखे एक लम्बे पत्र में रामकृष्ण के व्यक्तित्व और सिद्वांतों पर उन्होंने इस प्रकार प्रकाश डाला हैः
‘‘मतों आदि के बारे में मुझे यही कहना है कि यदि कोई रामकृष्णदेव को अवतार आदि स्वीकार करे तो भी ठीक ही है। परंन्तु सच बात तो यह है कि चरित्र के विषय में श्री रामकृष्ण