योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

देव सबसे आगे बढ़े हुए हैं। उनके पहले जो अवतारी पुरूष हुए हैं, उनसे वे अधिक उदार, अधिक मौलिक और अधिक प्रगतिशील थे। यह है किय योग, भक्ति, ज्ञान और कर्म के सर्वाेच्च भावों का सम्मिलित होना चाहिए, जिससे एक समाज का निर्माण हो सके।... प्राचीन आचार्य निस्संदेह अच्छे थे, परन्तु यह इस युग का नया धर्म है-अर्थात् योग, ज्ञान, भक्ति और कर्म का समन्वय आय और लिंगभेद के बिना, पतित से पतित तक में ज्ञान और भक्ति का प्रचार। पहले के अवतार ठीक थे,


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देव सबसे आगे बढ़े हुए हैं। उनके पहले जो अवतारी पुरूष हुए हैं, उनसे वे अधिक उदार, अधिक मौलिक और अधिक प्रगतिशील थे। यह है किय योग, भक्ति, ज्ञान और कर्म के सर्वाेच्च भावों का सम्मिलित होना चाहिए, जिससे एक समाज का निर्माण हो सके।... प्राचीन आचार्य निस्संदेह अच्छे थे, परन्तु यह इस युग का नया धर्म है-अर्थात् योग, ज्ञान, भक्ति और कर्म का समन्वय आय और लिंगभेद के बिना, पतित से पतित तक में ज्ञान और भक्ति का प्रचार। पहले के अवतार ठीक थे,


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