भी और किसी भी समय नहीं होता। एक ढाका ही में सुना है तीन-चार अवतार पैदा हो गए है। (वि.सा, षष्टम खंड पृष्ठ 176)
दरअसल विवेकानन्द अवतार को आचार्य के अर्थ में लेते हैं। यह सच है कि एक आचार्य के बाद दूसरा आचार्य आगे है-उनके द्वारा ज्ञान चाहे आध्यात्मिक हो या भौतिक उसकी निरन्तर प्रगति हुई है। अपने गुरू रामकृष्ण के बारे में भी लिखते हैं। ‘‘श्री रामकृष्ण अपने को अवतार शब्द के स्ािूल अर्थ में एक अवतार कहा करते थे, यद्यपि मैं
भी और किसी भी समय नहीं होता। एक ढाका ही में सुना है तीन-चार अवतार पैदा हो गए है। (वि.सा, षष्टम खंड पृष्ठ 176)
दरअसल विवेकानन्द अवतार को आचार्य के अर्थ में लेते हैं। यह सच है कि एक आचार्य के बाद दूसरा आचार्य आगे है-उनके द्वारा ज्ञान चाहे आध्यात्मिक हो या भौतिक उसकी निरन्तर प्रगति हुई है। अपने गुरू रामकृष्ण के बारे में भी लिखते हैं। ‘‘श्री रामकृष्ण अपने को अवतार शब्द के स्ािूल अर्थ में एक अवतार कहा करते थे, यद्यपि मैं