योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

यह बात समझ नहीं पाता था। मैं कहता था कि वे वेदान्त की दृष्टि से ब्रह्म हैं, किन्तु उनकी महा समाधि से ठीक पूर्व, जब उन्हें सांस लेने में कष्ट हो रहा था, मैं अपनेमन में सोच रहा था कि क्या इस वेदना में भी वे अपने को अवतार कह सकते हैं। उस समय उन्होंने मुझसे कहा, अरे, जो राम था, जो कृष्ण था, वही रामकृष्ण हो गया, लेकिन तेरे वेदान्त की दृष्टि से नहीं।...(वही, सप्तम खंड, पृष्ठ 269)

49 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

नरेन्द्र की


212 of 1197

यह बात समझ नहीं पाता था। मैं कहता था कि वे वेदान्त की दृष्टि से ब्रह्म हैं, किन्तु उनकी महा समाधि से ठीक पूर्व, जब उन्हें सांस लेने में कष्ट हो रहा था, मैं अपनेमन में सोच रहा था कि क्या इस वेदना में भी वे अपने को अवतार कह सकते हैं। उस समय उन्होंने मुझसे कहा, अरे, जो राम था, जो कृष्ण था, वही रामकृष्ण हो गया, लेकिन तेरे वेदान्त की दृष्टि से नहीं।...(वही, सप्तम खंड, पृष्ठ 269)

49 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

नरेन्द्र की


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