योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

कहानी को आगे बढ़ाने से पहले ईश्वर-दर्शन के बारे में भी विवेकानन्द का अभिमत जान लेना चाहिए ताकि भ्रम-भ्रान्ति की गुंजाइश न रहे। लिखा हैः

‘‘यदि तुम मुझसे पूछो कि इेश्वर है या नहीं और मैं यह कह दूं कि हां, ईश्वर है तो तुम झट मुझे अपनी युक्तियां बताने के लिए बाध्य करोगे और मुझ बेचारे को कुछ युक्तियां पेश करने के लिए अपनी सारी शक्ति लगा देनी पड़ेगी। किन्तु यदि कोई ईसा से यही प्रश्न पूछता तो ईसा तत्काल उत्तर देते, ‘हां, ईश्वर


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कहानी को आगे बढ़ाने से पहले ईश्वर-दर्शन के बारे में भी विवेकानन्द का अभिमत जान लेना चाहिए ताकि भ्रम-भ्रान्ति की गुंजाइश न रहे। लिखा हैः

‘‘यदि तुम मुझसे पूछो कि इेश्वर है या नहीं और मैं यह कह दूं कि हां, ईश्वर है तो तुम झट मुझे अपनी युक्तियां बताने के लिए बाध्य करोगे और मुझ बेचारे को कुछ युक्तियां पेश करने के लिए अपनी सारी शक्ति लगा देनी पड़ेगी। किन्तु यदि कोई ईसा से यही प्रश्न पूछता तो ईसा तत्काल उत्तर देते, ‘हां, ईश्वर


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