कह सकता है। इस सिद्वांत का तात्िवक विवेचन हम ‘आध्यात्मिक अद्वैतवाद बनाम भौतिक अद्वैतवाद, परिच्छेद में करेंगे। प्रत्येक सिद्वान्त चूंकि व्यक्तियों में मूर्तरूप धारण करता है, इसलिए नरेन्द्र अर्थात् विवेकानन्द की जीवन-कथा भी इस सिद्वान्त को समझने का ठोस माध्यम है और हम अपनी इस कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
कुछ दिनों बाद मेट्रोपोलिटन स्कूल की एक शाखा चांपातला मुहल्ले में खुली। ईश्वरचन्द्र विद्यासागर की सिफारिश से नरेन्द्र वहां
कह सकता है। इस सिद्वांत का तात्िवक विवेचन हम ‘आध्यात्मिक अद्वैतवाद बनाम भौतिक अद्वैतवाद, परिच्छेद में करेंगे। प्रत्येक सिद्वान्त चूंकि व्यक्तियों में मूर्तरूप धारण करता है, इसलिए नरेन्द्र अर्थात् विवेकानन्द की जीवन-कथा भी इस सिद्वान्त को समझने का ठोस माध्यम है और हम अपनी इस कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
कुछ दिनों बाद मेट्रोपोलिटन स्कूल की एक शाखा चांपातला मुहल्ले में खुली। ईश्वरचन्द्र विद्यासागर की सिफारिश से नरेन्द्र वहां