प्रधानाध्यापक नियुक्त हो गया। इससे पारिवारिक समस्या हल हो गई।
इस संकटकाल में कुछ संबंधियों ने नरेन्द्र और उसके घरवालों को खूब सताया। उन लोगों ने छलबल से उनके पैतृक मकान पर कब्ज़ा कर लिया। मां-भाइयों और नरेन्द्र को नानी के मकान में शरण लेनी पड़ीं नरेन्द्र ने संबंधियों के विरूद्व हाईकोर्ट तक मुकद्मा लड़ा। जिसमें कई बरस लगे और तब वह मकान उन्हें मिला।
रामकृष्ण के जितने शिष्य थे, वे सब 1884 तक उनके पास आ चुके थे। वे उन्हें काम-कंचन,
प्रधानाध्यापक नियुक्त हो गया। इससे पारिवारिक समस्या हल हो गई।
इस संकटकाल में कुछ संबंधियों ने नरेन्द्र और उसके घरवालों को खूब सताया। उन लोगों ने छलबल से उनके पैतृक मकान पर कब्ज़ा कर लिया। मां-भाइयों और नरेन्द्र को नानी के मकान में शरण लेनी पड़ीं नरेन्द्र ने संबंधियों के विरूद्व हाईकोर्ट तक मुकद्मा लड़ा। जिसमें कई बरस लगे और तब वह मकान उन्हें मिला।
रामकृष्ण के जितने शिष्य थे, वे सब 1884 तक उनके पास आ चुके थे। वे उन्हें काम-कंचन,