योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

‘सब जीवों पर दया’ करनी चाहिए वे भावाविष्ट हो गए और कहने लगे, ‘‘जीव पर दया-जीव पर दया? धत् तेरी, कीटाणु-कीट होकर तू जीव पर दया करेगा। दया करने वाला तू कौन है? नहीं, नहीं, जीवन पर दया नहीं, शिव ज्ञान से जीव की सेवा।’’

भावाविष्ट रामकृष्ण के ये शब्द सभी ने सुने, पर उनके गूढ़ अर्थ को केवल नरेन्द्र ही ने समझा। उसने कमरे से बाहर आकर शिवानन्द से कहा, ‘‘आज मैंने एक महान सत्य को सुना है। मैं इस जीवित सत्य की सारे संसार में घोषणा करूंगा।’’


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‘सब जीवों पर दया’ करनी चाहिए वे भावाविष्ट हो गए और कहने लगे, ‘‘जीव पर दया-जीव पर दया? धत् तेरी, कीटाणु-कीट होकर तू जीव पर दया करेगा। दया करने वाला तू कौन है? नहीं, नहीं, जीवन पर दया नहीं, शिव ज्ञान से जीव की सेवा।’’

भावाविष्ट रामकृष्ण के ये शब्द सभी ने सुने, पर उनके गूढ़ अर्थ को केवल नरेन्द्र ही ने समझा। उसने कमरे से बाहर आकर शिवानन्द से कहा, ‘‘आज मैंने एक महान सत्य को सुना है। मैं इस जीवित सत्य की सारे संसार में घोषणा करूंगा।’’


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