योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

गई तो मैंने महसूस किया कि क्रांतिकारी तत्वों में भी विरासत में मिली गलत प्रवृत्िायां मौजुद हैं तो ऐतिहासिक परम्परा से जुड़ने के बाद संघर्ष की लम्बी प्रक्रिया ही में दूर होंगी।

विवेकानन्द बीसवीं सदी के अंत तक हमारे चिंतन को विकसित करके जहां पहुंचा गए है। उससे सूत्र जोड़कर ही द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद और हमारी संस्कृति तथा परम्परा का विकास संभव है; यही सोचकर मैंने विवेकानन्द पर पुस्तक लिखना तय किया। वामपंथी छिछले छोकरों और


22 of 1197

गई तो मैंने महसूस किया कि क्रांतिकारी तत्वों में भी विरासत में मिली गलत प्रवृत्िायां मौजुद हैं तो ऐतिहासिक परम्परा से जुड़ने के बाद संघर्ष की लम्बी प्रक्रिया ही में दूर होंगी।

विवेकानन्द बीसवीं सदी के अंत तक हमारे चिंतन को विकसित करके जहां पहुंचा गए है। उससे सूत्र जोड़कर ही द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद और हमारी संस्कृति तथा परम्परा का विकास संभव है; यही सोचकर मैंने विवेकानन्द पर पुस्तक लिखना तय किया। वामपंथी छिछले छोकरों और


22 of 1197