योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

कुछ संजीदा लोगों ने भी इसका विरोध किया। मैंने इस विरोध को भी तर्क से काट दिया। लेनिन ने कहा है, ‘कम्युनिष्ट तभी नेतृत्व की भूमिका अदा कर सकते हैं, जब वे उसकी सही व्याख्या करें, जिसे लोग पहले से जानते-पहचानते हैं।’’

दरअसल हिंदू धर्म को प्रतिक्रियावादी मान लेने की भ्रांति ही इस विरोध का कारण है। ये तथाकथित माक्र्सवादी यह नहीं समझ पाये कि धार्मिक विचारधारा जब विभिन्न संस्थाओं का भौतिक रूप धारण कर लेती है तो संस्कृति और


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कुछ संजीदा लोगों ने भी इसका विरोध किया। मैंने इस विरोध को भी तर्क से काट दिया। लेनिन ने कहा है, ‘कम्युनिष्ट तभी नेतृत्व की भूमिका अदा कर सकते हैं, जब वे उसकी सही व्याख्या करें, जिसे लोग पहले से जानते-पहचानते हैं।’’

दरअसल हिंदू धर्म को प्रतिक्रियावादी मान लेने की भ्रांति ही इस विरोध का कारण है। ये तथाकथित माक्र्सवादी यह नहीं समझ पाये कि धार्मिक विचारधारा जब विभिन्न संस्थाओं का भौतिक रूप धारण कर लेती है तो संस्कृति और


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