नरेन्द्र ने पूछा, ‘‘महाराज, क्या उनसे ईश्वर-प्राप्ति में कोई सहायता मिलेगी?’’
रामकृष्ण ने उत्तर दिया, ‘‘नहीं, सो तो नहीं होगा, पर इहलोक की कोई भी इच्छा अपूर्ण न रहेगी।’’
नरेन्द्र ने निस्संकोच उत्तर दिया, ‘तब तो महाराज, वे मुझे नहीं चाहिए।’’
1885 में रामकृष्ण के गले में कैंसर हो गया। डाॅ. महेन्द्रा लाल सरकार का इलाज था, पर रोग कम होने के बजाय बढ़ता चला गया। उन्हें पहले कलकत्ता के मकान में और फिर काशीपुर के उद्यान-भवन
नरेन्द्र ने पूछा, ‘‘महाराज, क्या उनसे ईश्वर-प्राप्ति में कोई सहायता मिलेगी?’’
रामकृष्ण ने उत्तर दिया, ‘‘नहीं, सो तो नहीं होगा, पर इहलोक की कोई भी इच्छा अपूर्ण न रहेगी।’’
नरेन्द्र ने निस्संकोच उत्तर दिया, ‘तब तो महाराज, वे मुझे नहीं चाहिए।’’
1885 में रामकृष्ण के गले में कैंसर हो गया। डाॅ. महेन्द्रा लाल सरकार का इलाज था, पर रोग कम होने के बजाय बढ़ता चला गया। उन्हें पहले कलकत्ता के मकान में और फिर काशीपुर के उद्यान-भवन