योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

में रखा गया। नरेन्द्र ने अगस्त महीने में अध्यापन कार्य छोड़ दिया था और दूसरे शिष्यों के साथ काशीपुर में रहने

51 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

लगा था। गुरू-सेवा के अलावा गम्भीर श्रद्वा के साथ उपनिषद्, अष्टवक्र संहिताा, पंचदशी, विवेकचुड़ामणि आदि ग्रंथों का अध्ययन भी हो रहा था। साधना-पूजा पर काफी आगे बढ़ जाने के बाद नरेन्द्र के मन में निर्विकल्प समाधि की इच्छा प्रबल हो उठी। वह जानता था कि परमहंस इसके लिए मना कर रहे हैं, फिर भी वह एक दिन साहस करके उनके पास जा पहुचां।


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में रखा गया। नरेन्द्र ने अगस्त महीने में अध्यापन कार्य छोड़ दिया था और दूसरे शिष्यों के साथ काशीपुर में रहने

51 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

लगा था। गुरू-सेवा के अलावा गम्भीर श्रद्वा के साथ उपनिषद्, अष्टवक्र संहिताा, पंचदशी, विवेकचुड़ामणि आदि ग्रंथों का अध्ययन भी हो रहा था। साधना-पूजा पर काफी आगे बढ़ जाने के बाद नरेन्द्र के मन में निर्विकल्प समाधि की इच्छा प्रबल हो उठी। वह जानता था कि परमहंस इसके लिए मना कर रहे हैं, फिर भी वह एक दिन साहस करके उनके पास जा पहुचां।


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