योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

परम्परा इन संस्थाओं और भौतिक उन्नति रूक जाए तो इन संस्थाओं और धार्मिक मान्यताओं पर सीधा प्रहार करने से कोई लाभ नहीं। जब भौतिक और आर्थिक परिवर्तन आएगा, तभी इन संस्थाओं को तभी छोड़ेंगे जब उन्हें यह विश्वास हो आएगा कि हम जो नई वैज्ञानिक मान्यताएं उन्हें दे रहे हैं, उनकी पहली मान्यताओं से बेहतर हैं और उनकी सांस्कृतिक परम्परा को आगे बढ़ाने और समृद्व करने वाली हैं, अन्यथा नहीं।

ये तथाकथित माक्र्सवादी यह नहीं समझ पाए कि धर्म


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परम्परा इन संस्थाओं और भौतिक उन्नति रूक जाए तो इन संस्थाओं और धार्मिक मान्यताओं पर सीधा प्रहार करने से कोई लाभ नहीं। जब भौतिक और आर्थिक परिवर्तन आएगा, तभी इन संस्थाओं को तभी छोड़ेंगे जब उन्हें यह विश्वास हो आएगा कि हम जो नई वैज्ञानिक मान्यताएं उन्हें दे रहे हैं, उनकी पहली मान्यताओं से बेहतर हैं और उनकी सांस्कृतिक परम्परा को आगे बढ़ाने और समृद्व करने वाली हैं, अन्यथा नहीं।

ये तथाकथित माक्र्सवादी यह नहीं समझ पाए कि धर्म


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