योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



पंडित ने रामकृष्ण से कहा, ‘‘धर्मशास्त्रों का मत है कि आप जैसे सन्त अपने इच्छाबल ही से अपनी चिकित्सा कर सकते हैं।’’

रामकृष्ण बोले, ‘‘मैंने अपना मन सम्पूर्णतया भगवान को सौंप दिया है। आप क्या चाहते हैं कि वह मैं वापस मांगू?’’ शिष्यों का उलाहना था कि रामकृष्ण स्वस्थ होना नहीं चाहते हैं।

‘‘तुम क्या समझते हो कि मैं अपनी इच्छा से कष्ट भोग रहा हूं? मैं तो अच्छा होना चाहता हूं, पर वह मां पर निर्भर है।’’ ‘‘तो मां से प्रार्थना कीजिए।’’


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पंडित ने रामकृष्ण से कहा, ‘‘धर्मशास्त्रों का मत है कि आप जैसे सन्त अपने इच्छाबल ही से अपनी चिकित्सा कर सकते हैं।’’

रामकृष्ण बोले, ‘‘मैंने अपना मन सम्पूर्णतया भगवान को सौंप दिया है। आप क्या चाहते हैं कि वह मैं वापस मांगू?’’ शिष्यों का उलाहना था कि रामकृष्ण स्वस्थ होना नहीं चाहते हैं।

‘‘तुम क्या समझते हो कि मैं अपनी इच्छा से कष्ट भोग रहा हूं? मैं तो अच्छा होना चाहता हूं, पर वह मां पर निर्भर है।’’ ‘‘तो मां से प्रार्थना कीजिए।’’


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