योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

जिनके द्वारा तू खा सकता है।’ मैं लज्जित हो गया और फिर मुझसे कुछ नहीं कहा गया।’’

कई दिनों के बाद उन्होंने कहा, ‘‘मेरी शिक्षा प्रायः समाप्त हो गई है। मैं दूसरों को अब और शिक्षा नहीं दे सकता, क्योंकि मुझे दीखता है कि सभी कुछ प्रभुमय है। तब मैं पूछता हूं, मैं किसे शिक्षा दूं?’’ (विवेकानन्द, पृष्ठ 55)

रविवार 15 अगस्त, 1886 को इस महापुरूष के जीवन का सूर्य अस्त हो गया।

अपना समस्त ज्ञान और ‘खोल’ वे अपने सुयोग्य उत्तराधिकारी


232 of 1197

जिनके द्वारा तू खा सकता है।’ मैं लज्जित हो गया और फिर मुझसे कुछ नहीं कहा गया।’’

कई दिनों के बाद उन्होंने कहा, ‘‘मेरी शिक्षा प्रायः समाप्त हो गई है। मैं दूसरों को अब और शिक्षा नहीं दे सकता, क्योंकि मुझे दीखता है कि सभी कुछ प्रभुमय है। तब मैं पूछता हूं, मैं किसे शिक्षा दूं?’’ (विवेकानन्द, पृष्ठ 55)

रविवार 15 अगस्त, 1886 को इस महापुरूष के जीवन का सूर्य अस्त हो गया।

अपना समस्त ज्ञान और ‘खोल’ वे अपने सुयोग्य उत्तराधिकारी


232 of 1197