विवेकानन्द को विरासत में दे गए। विवेकानन्द ने इस ज्ञान का विकास और खोल का विस्तार कहां तक किया, यह हम आगे देखेंगे। नरेन्द्र को विवेकानन्द बनाने में परमहंस ने जो भूमिका अदा की, रोमां रोलां ने उसका उल्लेख इन शब्दों मंे किया हैः
53 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
‘‘जो धारा विवेकानन्द की असाधारण नियति को गढ़ रही थी, वह धरती के पेट ही में समा गई होती यदि रामकृष्ण की अचूक दृष्टि ने मानो अमोघ बाण की भांति पथ-रोचक चट्टान को फोड़कर
विवेकानन्द को विरासत में दे गए। विवेकानन्द ने इस ज्ञान का विकास और खोल का विस्तार कहां तक किया, यह हम आगे देखेंगे। नरेन्द्र को विवेकानन्द बनाने में परमहंस ने जो भूमिका अदा की, रोमां रोलां ने उसका उल्लेख इन शब्दों मंे किया हैः
53 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
‘‘जो धारा विवेकानन्द की असाधारण नियति को गढ़ रही थी, वह धरती के पेट ही में समा गई होती यदि रामकृष्ण की अचूक दृष्टि ने मानो अमोघ बाण की भांति पथ-रोचक चट्टान को फोड़कर