‘‘हमारे कोई मित्र न थे। हमें सुनता भी कौन? कुछ विचित्र-सी विचारधारा को लिए हुए छोकरे जो थे न? कम से कम भारत में तो छोकरों की कोई गिनती
55 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
नहीं। ज़रा सोचिए-बारह लड़के लोगों को सुनावें भी बड़ी-बड़ी बातें, बड़े-बड़े सिद्वान्त, और यह शेखी हांके कि वे इन विचारों को जीवन में चरितार्थ? साक्षात् करेंगे! हां, सभी ने हंसी की, हंसी करते-करते वे गम्भीर हो गए- हमारे पीछे पड़ गए-उत्पीड़न करने लगे। बालकों के
‘‘हमारे कोई मित्र न थे। हमें सुनता भी कौन? कुछ विचित्र-सी विचारधारा को लिए हुए छोकरे जो थे न? कम से कम भारत में तो छोकरों की कोई गिनती
55 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
नहीं। ज़रा सोचिए-बारह लड़के लोगों को सुनावें भी बड़ी-बड़ी बातें, बड़े-बड़े सिद्वान्त, और यह शेखी हांके कि वे इन विचारों को जीवन में चरितार्थ? साक्षात् करेंगे! हां, सभी ने हंसी की, हंसी करते-करते वे गम्भीर हो गए- हमारे पीछे पड़ गए-उत्पीड़न करने लगे। बालकों के