योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

माता-पिता हमें क्रोध से धिक्कारने लगे और ज्यों-ज्यों लोगों ने हमारी खिल्ली उड़ाई, त्यों-त्यों हम और भी दृढ़ होते गए।’’ (वि. सा., इशम खंड, पृष्ठ 10)

पारिवारिक अभाव अभी दूर नहीं हुआ था, इसलिए विवेकानन्द चाहे अधिकांश समय मठ में बिताते और गुरू-भाइयों की शिक्षा-दीक्षा तथा देखभाल पर पूरा ध्यान देते थे, पर वे रहते घर पर थे। मकान का झगड़ा अभी समाप्त नहीं हुआ था। संबंधियों ने मुकदमें की अपील कर दी थी। अपील का फेसला अभी नहीं हुआ


240 of 1197

माता-पिता हमें क्रोध से धिक्कारने लगे और ज्यों-ज्यों लोगों ने हमारी खिल्ली उड़ाई, त्यों-त्यों हम और भी दृढ़ होते गए।’’ (वि. सा., इशम खंड, पृष्ठ 10)

पारिवारिक अभाव अभी दूर नहीं हुआ था, इसलिए विवेकानन्द चाहे अधिकांश समय मठ में बिताते और गुरू-भाइयों की शिक्षा-दीक्षा तथा देखभाल पर पूरा ध्यान देते थे, पर वे रहते घर पर थे। मकान का झगड़ा अभी समाप्त नहीं हुआ था। संबंधियों ने मुकदमें की अपील कर दी थी। अपील का फेसला अभी नहीं हुआ


240 of 1197