योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

वे भी अब मठ में लौट आए। विवेकानन्द की सतर्क देखभाल में वे सब दर्शन शास्त्र, वेदान्त, पुराण, भागवत इत्यादि के पाठ तथा जप, ध्यान, कठोर तपस्या आदि में लग गए। विवेकानन्द सुबह-सवेरे गुरू गम्भीर ध्वनि में उन्हें पुकारते, ‘हे अमृत के पुत्रगण! अमृत पान करने के लिए जागा, जागो।’’ जप, ध्यान आदि के बाद विवेकानन्द गुरू भाइयों को एक साथ बिठाकर किसी दिन उनके सम्मुख गीता का और किसी दिन टामस-एक-केम्पिस के -ईसानुसरण’ का पाठ

56 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द


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वे भी अब मठ में लौट आए। विवेकानन्द की सतर्क देखभाल में वे सब दर्शन शास्त्र, वेदान्त, पुराण, भागवत इत्यादि के पाठ तथा जप, ध्यान, कठोर तपस्या आदि में लग गए। विवेकानन्द सुबह-सवेरे गुरू गम्भीर ध्वनि में उन्हें पुकारते, ‘हे अमृत के पुत्रगण! अमृत पान करने के लिए जागा, जागो।’’ जप, ध्यान आदि के बाद विवेकानन्द गुरू भाइयों को एक साथ बिठाकर किसी दिन उनके सम्मुख गीता का और किसी दिन टामस-एक-केम्पिस के -ईसानुसरण’ का पाठ

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