योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

मठ छोड़कर चला गया। विवेकानन्द बड़े व्याकुल हुए और उन्होंने राखाल से कहा, ‘‘तुमने उसे क्यों जाने दिया? देख राजा, मैं कैसी विकट स्थिति में पड़ गया हूं। एक संसार (घर-द्वार) छोड़कर यहां आया और यहां माया का एक नया संसार जोड़ बैठा हूं। इस लड़के के लिए प्राण बड़े ही व्याकुल हो उठे हैं।’’

सारदाप्रसन्न जाते समय एक पत्र लिखकर छोड़ गया था। अब किसी व्यक्ति ने वह पत्र लाकर विवेकानन्द को दिया। लिखा था, ‘‘मैं पैदल श्री वृन्दावन जा रहा हूं।


249 of 1197

मठ छोड़कर चला गया। विवेकानन्द बड़े व्याकुल हुए और उन्होंने राखाल से कहा, ‘‘तुमने उसे क्यों जाने दिया? देख राजा, मैं कैसी विकट स्थिति में पड़ गया हूं। एक संसार (घर-द्वार) छोड़कर यहां आया और यहां माया का एक नया संसार जोड़ बैठा हूं। इस लड़के के लिए प्राण बड़े ही व्याकुल हो उठे हैं।’’

सारदाप्रसन्न जाते समय एक पत्र लिखकर छोड़ गया था। अब किसी व्यक्ति ने वह पत्र लाकर विवेकानन्द को दिया। लिखा था, ‘‘मैं पैदल श्री वृन्दावन जा रहा हूं।


249 of 1197