से करा दिया। युवा संन्यासी विवेकानन्द के साथ धर्म, समाज, नीति तथा देश की उन्नति संबंधी चर्चा करके भूदेव बाबू इतने मुग्ध हुए कि उन्होंने उन सज्जन से कहा, ‘‘इतनी छोटी अवस्था में इतनी गम्भीर अंतदृष्टि! मुझे विश्वास है कि भविष्य में वे एक महान व्यक्ति बनेंगे।’’
वाराणसी में उन दिनों स्वामी भास्करानन्द के गुणों की बड़ी चर्चा थी। विवेकानन्द एक दिन उनके आश्रम में भी गए। वे अपने शिष्यांे तथा भक्तों से घिरे बैठे थे। विवेकानन्द
से करा दिया। युवा संन्यासी विवेकानन्द के साथ धर्म, समाज, नीति तथा देश की उन्नति संबंधी चर्चा करके भूदेव बाबू इतने मुग्ध हुए कि उन्होंने उन सज्जन से कहा, ‘‘इतनी छोटी अवस्था में इतनी गम्भीर अंतदृष्टि! मुझे विश्वास है कि भविष्य में वे एक महान व्यक्ति बनेंगे।’’
वाराणसी में उन दिनों स्वामी भास्करानन्द के गुणों की बड़ी चर्चा थी। विवेकानन्द एक दिन उनके आश्रम में भी गए। वे अपने शिष्यांे तथा भक्तों से घिरे बैठे थे। विवेकानन्द