को संन्यास-जीवन संबंधी आदर्श का उपदेश देते हुए भास्करानन्द ने यह कह दिया कि काम कांचन का पूर्णरूप से कोई भी त्याग नहीं कर सकता। विवेकानन्द ने इसका प्रतिवाद करते हुए कहा, ‘‘महाराज, ऐसे अनेक संन्यासी हैं, जो सम्पूर्ण रूप से काम-कंचन के बंधनों से मुक्त हैं।’’ और उदाहरण के लिए उन्हांेने रामकृष्ण परमहंसस का नाम लिया। भास्करानन्द हंसते हए बोले, ‘‘तुम बच्चें हो, इस उम्र में वह बात नहीं समझ सकोगे। फिर जब उन्होंने रामकृष्ण के
को संन्यास-जीवन संबंधी आदर्श का उपदेश देते हुए भास्करानन्द ने यह कह दिया कि काम कांचन का पूर्णरूप से कोई भी त्याग नहीं कर सकता। विवेकानन्द ने इसका प्रतिवाद करते हुए कहा, ‘‘महाराज, ऐसे अनेक संन्यासी हैं, जो सम्पूर्ण रूप से काम-कंचन के बंधनों से मुक्त हैं।’’ और उदाहरण के लिए उन्हांेने रामकृष्ण परमहंसस का नाम लिया। भास्करानन्द हंसते हए बोले, ‘‘तुम बच्चें हो, इस उम्र में वह बात नहीं समझ सकोगे। फिर जब उन्होंने रामकृष्ण के