योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

विचार-विहीन एवं बाह्म-आचार-परायण इन नर-नारियों के बीच भी धर्म की युग-युगान्तर से संचित महिमा की उपलब्धि की। इसीलिए हम देखते हैं, वराहनगर मठ में लौटकर वे गुरू-भाइयों को प्रचार कार्य के लिए प्रोत्साहित करने लगे। भारतवर्ष को देखना होगा, समझना होगा, इन लाखों, करोड़ों नर-नारियों की जीवनयात्रा के कितने भिन्न-भिन्न स्तरों में कौन-सी वेदना, कौन-सा अभाव दिन-रात एक अपूर्ण लालसा की ज्वाला भड़काकर उन्हें दग्ध कर रहा है, वह समझना होगा।


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विचार-विहीन एवं बाह्म-आचार-परायण इन नर-नारियों के बीच भी धर्म की युग-युगान्तर से संचित महिमा की उपलब्धि की। इसीलिए हम देखते हैं, वराहनगर मठ में लौटकर वे गुरू-भाइयों को प्रचार कार्य के लिए प्रोत्साहित करने लगे। भारतवर्ष को देखना होगा, समझना होगा, इन लाखों, करोड़ों नर-नारियों की जीवनयात्रा के कितने भिन्न-भिन्न स्तरों में कौन-सी वेदना, कौन-सा अभाव दिन-रात एक अपूर्ण लालसा की ज्वाला भड़काकर उन्हें दग्ध कर रहा है, वह समझना होगा।


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