योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

इन दोनों के आदर्शो से गिरे हुए हैं-उनमें कम से कम एक लाख में एक तो आपके जैसा निकले, ऐसी मेरी प्रार्थना है। मेरे जिन ब्राह्मण गुरू-भाइयों ने आपके सद्गुणों की चर्चा सुनी है, वे सब आपको सादर प्रणाम करते हैं। (वि.सा., प्रथम खंड, पृष्ठ 340)

इसके बाद शास्त्र सम्बंधी कोई संदेह, कोई समस्या उठ खड़ी होती तो स्वामी विवेकानन्द उसका समाधान उनसे पूछा करते थे। लेकिन आठ बरस बाद 30 मई, 1897 के एक पत्र में अल्मोड़ा से लिखा हैः

‘‘यद्यपि बहुत दिनों से मेरा आपसे पत्र-व्यवहार नहीं था,


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इन दोनों के आदर्शो से गिरे हुए हैं-उनमें कम से कम एक लाख में एक तो आपके जैसा निकले, ऐसी मेरी प्रार्थना है। मेरे जिन ब्राह्मण गुरू-भाइयों ने आपके सद्गुणों की चर्चा सुनी है, वे सब आपको सादर प्रणाम करते हैं। (वि.सा., प्रथम खंड, पृष्ठ 340)

इसके बाद शास्त्र सम्बंधी कोई संदेह, कोई समस्या उठ खड़ी होती तो स्वामी विवेकानन्द उसका समाधान उनसे पूछा करते थे। लेकिन आठ बरस बाद 30 मई, 1897 के एक पत्र में अल्मोड़ा से लिखा हैः

‘‘यद्यपि बहुत दिनों से मेरा आपसे पत्र-व्यवहार नहीं था,


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