योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

परन्तु औरों से आपका प्रायः सब समाचार सुनता रहा हूं। कुछ समय हुआ, आपने कृपापूर्वक मुझे इंग्लैंड में गीता के अनुवाद की एक प्रति भेजी थी। उसकी जिल्द पर आपके हाथ की एक पंक्ति लिखी हुई थी। इस उपहार की स्वीकृति थोड़े से शब्दों में दिए जाने के कारण मैंने सुना कि आपको मेरी आपके प्रति पुराने पे्रम की भावना में संदेह उत्पन्न हो गया है।’’

‘‘कृपया इस संदेह को आधाररहित जानिए। उस संक्षिप्त स्वीकृति का कारण यह था कि पांच वर्ष में मैंने


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परन्तु औरों से आपका प्रायः सब समाचार सुनता रहा हूं। कुछ समय हुआ, आपने कृपापूर्वक मुझे इंग्लैंड में गीता के अनुवाद की एक प्रति भेजी थी। उसकी जिल्द पर आपके हाथ की एक पंक्ति लिखी हुई थी। इस उपहार की स्वीकृति थोड़े से शब्दों में दिए जाने के कारण मैंने सुना कि आपको मेरी आपके प्रति पुराने पे्रम की भावना में संदेह उत्पन्न हो गया है।’’

‘‘कृपया इस संदेह को आधाररहित जानिए। उस संक्षिप्त स्वीकृति का कारण यह था कि पांच वर्ष में मैंने


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