योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

आपकी लिखी हुई एक ही पंक्ति उस अंगे्रजी गीता की ज़िल्द पर देखी, इस बात से मैंने यह विचार किया कि यदि इससे अधिक लिखने का आपको अवकाश न था तो क्या अधिक पढ़ने का अवकाश हो सकता है? दूसरी बात, मुझे यह पता लगा कि हिंदू धर्म के गोरांग मिशनरियों के आप विशेष मित्र हैं और दुष्ट काले भारतवासी आपकी घृणा के पात्र हैं। यह मन में शंका उत्पन्न करने वाला विषय था। तीसरे, मैं म्लेच्छ, शूद्र, इत्यादि हंू- जो मिले सो खाता हूं, वह भी जिस किसी


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आपकी लिखी हुई एक ही पंक्ति उस अंगे्रजी गीता की ज़िल्द पर देखी, इस बात से मैंने यह विचार किया कि यदि इससे अधिक लिखने का आपको अवकाश न था तो क्या अधिक पढ़ने का अवकाश हो सकता है? दूसरी बात, मुझे यह पता लगा कि हिंदू धर्म के गोरांग मिशनरियों के आप विशेष मित्र हैं और दुष्ट काले भारतवासी आपकी घृणा के पात्र हैं। यह मन में शंका उत्पन्न करने वाला विषय था। तीसरे, मैं म्लेच्छ, शूद्र, इत्यादि हंू- जो मिले सो खाता हूं, वह भी जिस किसी


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