योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



अगस्त, 1888 में स्वामी विवेकानन्द काशी ही से तीर्थ-यात्रा पर रवाना हुए। उत्तर भारत के कई स्ािानों पर होते हुए वे सरयू नदी के तट पर स्थित अयोध्या पहुंचे। यहां आकर बचपन की अनेक स्मृतियों उनके मन में जाग उठी। रामारण से उन्हें विशेष अनुराग था, सीता राम की कहानी उन्होंने मां से सुनी थी और महावीर उनका चरित्र नायक था। अयोध्या में कुछ दिन रहकर उन्होंने रामायण संन्यासियों से सत्संग किया और फिर वे लखनऊ और आगरा होते हुए पैदल ही वृन्दावन की ओर चले।


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अगस्त, 1888 में स्वामी विवेकानन्द काशी ही से तीर्थ-यात्रा पर रवाना हुए। उत्तर भारत के कई स्ािानों पर होते हुए वे सरयू नदी के तट पर स्थित अयोध्या पहुंचे। यहां आकर बचपन की अनेक स्मृतियों उनके मन में जाग उठी। रामारण से उन्हें विशेष अनुराग था, सीता राम की कहानी उन्होंने मां से सुनी थी और महावीर उनका चरित्र नायक था। अयोध्या में कुछ दिन रहकर उन्होंने रामायण संन्यासियों से सत्संग किया और फिर वे लखनऊ और आगरा होते हुए पैदल ही वृन्दावन की ओर चले।


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