अपने घर ले गया और विवेकानन्द ने गुप्त परिवार में कुछ दिन बिताए। जब वे वहां से चले तो शरद उन्हें छोड़ने को तैयार नहीं था। वह पिता की आज्ञा लेकर विवेकानन्द का पहला शिष्य बना और दंड-कमंडलू लेकर उनके साथ चला। शरच्चन्द्र का संन्यासी नाम स्वामी सदानन्द रखा गया और बाद में उसने गुरू के बुलावे पर अमेरिका जाकर वेदान्त-प्रचार में उनका हाथ बटाया।
शिष्य और गुरू एक साथ यात्रा पर चल पड़े। लेकिन सदानन्द संन्यासी जीवन और यात्रा की कठिनाइयांे का अभ्यस्त नहीं था,
अपने घर ले गया और विवेकानन्द ने गुप्त परिवार में कुछ दिन बिताए। जब वे वहां से चले तो शरद उन्हें छोड़ने को तैयार नहीं था। वह पिता की आज्ञा लेकर विवेकानन्द का पहला शिष्य बना और दंड-कमंडलू लेकर उनके साथ चला। शरच्चन्द्र का संन्यासी नाम स्वामी सदानन्द रखा गया और बाद में उसने गुरू के बुलावे पर अमेरिका जाकर वेदान्त-प्रचार में उनका हाथ बटाया।
शिष्य और गुरू एक साथ यात्रा पर चल पड़े। लेकिन सदानन्द संन्यासी जीवन और यात्रा की कठिनाइयांे का अभ्यस्त नहीं था,