योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

को आजीवन ऋणी कर दिया है। वे सब आपको सादर प्रणाम करते हैं। मैंने आपसे पाणिनि व्याकरण की जो प्रति मंगाई है, वह केवल अपने ही

61 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

लिए नहीं है, वास्तव में इस मठ में संस्कृत धर्मग्रंथों का खूब अध्ययन हो रहा है। वेदों के लिए तो यहां तक कहा जा सकता है कि उनका अध्ययन बंगाल में बिल्कुल छूट गया है, इस मठ में बहुत से लोग संस्कृत जानते हैं और उनकी इच्छा है कि वे वेदों के संहितादि भागों पर पूर्ण अधिकार


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को आजीवन ऋणी कर दिया है। वे सब आपको सादर प्रणाम करते हैं। मैंने आपसे पाणिनि व्याकरण की जो प्रति मंगाई है, वह केवल अपने ही

61 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

लिए नहीं है, वास्तव में इस मठ में संस्कृत धर्मग्रंथों का खूब अध्ययन हो रहा है। वेदों के लिए तो यहां तक कहा जा सकता है कि उनका अध्ययन बंगाल में बिल्कुल छूट गया है, इस मठ में बहुत से लोग संस्कृत जानते हैं और उनकी इच्छा है कि वे वेदों के संहितादि भागों पर पूर्ण अधिकार


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