अच्छी तरह कर सकते हैं। अतः यदि आप समझते हैं कि (पाण्नििकृत) अष्टाध्यायी हमारे लिए सबसे अधिक उपयुक्त है, तो उसे भेजकर हमें आप जीवन भर के लिए अनुग्रहीत करेंगे। इस विषय में मैं यह कह दूं कि आप अपनी सुविधा और इच्छा का अवश्य स्मरण रखें। इस मठ में अध्यवसायी, योग्य और कुशाग्रबुद्वि वाले मनुष्यों की कमी नहीं है।...’’
इन दिनों विवेकानन्द ने वेदों के साथ-साथ उपनिषद् और शंकर भाष्य का भी गंभीर अध्ययन किया। उनके मन में जो संदेह
अच्छी तरह कर सकते हैं। अतः यदि आप समझते हैं कि (पाण्नििकृत) अष्टाध्यायी हमारे लिए सबसे अधिक उपयुक्त है, तो उसे भेजकर हमें आप जीवन भर के लिए अनुग्रहीत करेंगे। इस विषय में मैं यह कह दूं कि आप अपनी सुविधा और इच्छा का अवश्य स्मरण रखें। इस मठ में अध्यवसायी, योग्य और कुशाग्रबुद्वि वाले मनुष्यों की कमी नहीं है।...’’
इन दिनों विवेकानन्द ने वेदों के साथ-साथ उपनिषद् और शंकर भाष्य का भी गंभीर अध्ययन किया। उनके मन में जो संदेह