उठे उन्हें मिटाने के लिए वे बराबर प्रभदादास मित्र को लिखते रहे। ये सब पत्र -विवेकानन्द साहित्य, प्रथम खंड में संग्रहीत हैं। 17 अगस्त, 1889 के लम्बे पत्र में पूछे गए बारह प्रश्नों में से हम यहां सिर्फ तीन का उल्लेख करते हैं, इससे विवेकानन्द की विचार-पद्वति का पता चलेगा। लिखा है:
‘‘यदि वेद नित्य हैं, तो फिर इन कथाओं में कहां तक सत्य है कि ‘धर्म की वह विधि द्वापर के लिए है’ और ‘यह कलियुग के लिए है’ इत्यादि, इत्यादि।
10.
उठे उन्हें मिटाने के लिए वे बराबर प्रभदादास मित्र को लिखते रहे। ये सब पत्र -विवेकानन्द साहित्य, प्रथम खंड में संग्रहीत हैं। 17 अगस्त, 1889 के लम्बे पत्र में पूछे गए बारह प्रश्नों में से हम यहां सिर्फ तीन का उल्लेख करते हैं, इससे विवेकानन्द की विचार-पद्वति का पता चलेगा। लिखा है:
‘‘यदि वेद नित्य हैं, तो फिर इन कथाओं में कहां तक सत्य है कि ‘धर्म की वह विधि द्वापर के लिए है’ और ‘यह कलियुग के लिए है’ इत्यादि, इत्यादि।
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