योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

यह मुझे जंचा नहीं। स्पेंसर स्वयं उनसे बहुत कुछ सीखा है, आपका विरोधी ‘गफ’ (ळवनही) अपने ‘होगल’ को समझ सका है या नहीं, इसमें सन्देह है। जो हा, आपका उत्तर काफी तीक्ष्ण एवं अकाट्य है।’’

और 4 जुलाई को अपने बारे में लिखा था:

‘‘परन्तु मुझको तो इस समय अब एक नया ही रोग है। परमात्मा की कृपा पर मेरा अखंड विश्वास है। वह कभी टूटने वाला भी नहीं। धर्मग्रंथों पर मेरी अटूट श्रद्वा है। परन्तु प्रभु की इच्छा से मेरे गत छःसात वर्ष निरन्तर


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यह मुझे जंचा नहीं। स्पेंसर स्वयं उनसे बहुत कुछ सीखा है, आपका विरोधी ‘गफ’ (ळवनही) अपने ‘होगल’ को समझ सका है या नहीं, इसमें सन्देह है। जो हा, आपका उत्तर काफी तीक्ष्ण एवं अकाट्य है।’’

और 4 जुलाई को अपने बारे में लिखा था:

‘‘परन्तु मुझको तो इस समय अब एक नया ही रोग है। परमात्मा की कृपा पर मेरा अखंड विश्वास है। वह कभी टूटने वाला भी नहीं। धर्मग्रंथों पर मेरी अटूट श्रद्वा है। परन्तु प्रभु की इच्छा से मेरे गत छःसात वर्ष निरन्तर


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