योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

विभिन्न विघ्न-बाधाओं से लड़ते हुए बीते। मुझे आदर्श शास्त्र प्राप्त हुआ है, मैंने एक आदर्श महापुरूष के दर्शन प्राप्त किए हैं, फिर भी किसी वस्तु का अन्त तक निर्वाह मुझसे नहीं हो पाता, यही मेरे लिए कष्ट की बात है।’’

‘‘और विशेषतः कलकत्ता के आस-पास रहकर मुझे सफलता पाने की कोई आशा नहीं। कलकत्ता में मेरी मां और दो भाई रहते हैं। मैं सबसे बड़ा हूं। दूसरा भाई एफ. ए. परीक्षा की तैयारी कर रहा है और तीसरा अभी छोटा है।’’

प्रिवार


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विभिन्न विघ्न-बाधाओं से लड़ते हुए बीते। मुझे आदर्श शास्त्र प्राप्त हुआ है, मैंने एक आदर्श महापुरूष के दर्शन प्राप्त किए हैं, फिर भी किसी वस्तु का अन्त तक निर्वाह मुझसे नहीं हो पाता, यही मेरे लिए कष्ट की बात है।’’

‘‘और विशेषतः कलकत्ता के आस-पास रहकर मुझे सफलता पाने की कोई आशा नहीं। कलकत्ता में मेरी मां और दो भाई रहते हैं। मैं सबसे बड़ा हूं। दूसरा भाई एफ. ए. परीक्षा की तैयारी कर रहा है और तीसरा अभी छोटा है।’’

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