मुकदमा समाप्त हो चुका है। आशीर्वाद दीजिए कि कुछ दिन कलकत्ता में ठहरकर उन सब मामलों को सुलझाने के बाद में सदा के लिए विदा हो सकूं।’’
इस बीच में उन्होंने छोटी-छोटी यात्राएं की। फरवरी, 1889 में वे रामकृष्ण की जन्मभूमि कामारपुकुर, श्री माता शारदामणि की जन्मभूमि जयरामवटी गए। वहां से लौटते समय वे बीमार हए और काफी दिन चारपाई नहीं छोड़ पाए। जुलाई में शिमलतुल और दिसम्बर के अंत में वैद्यनाथ और इलाहाबाद गए। 1890 में गाजीपुर की दो बार यात्रा की,
मुकदमा समाप्त हो चुका है। आशीर्वाद दीजिए कि कुछ दिन कलकत्ता में ठहरकर उन सब मामलों को सुलझाने के बाद में सदा के लिए विदा हो सकूं।’’
इस बीच में उन्होंने छोटी-छोटी यात्राएं की। फरवरी, 1889 में वे रामकृष्ण की जन्मभूमि कामारपुकुर, श्री माता शारदामणि की जन्मभूमि जयरामवटी गए। वहां से लौटते समय वे बीमार हए और काफी दिन चारपाई नहीं छोड़ पाए। जुलाई में शिमलतुल और दिसम्बर के अंत में वैद्यनाथ और इलाहाबाद गए। 1890 में गाजीपुर की दो बार यात्रा की,